#जाएँ_कहाँ?

KahaN

पराये पराये होते हैं
सार्वभौमिक बात है,
अपने पराये हो जाते हैं
यह भी सभी को ज्ञात है.
मगर जब अपने आप में ही
हम हो जाएँ पराये
ऐसे में कोई तो हमें बताये
भला हम कहाँ जाएँ?

कभी कभी ऐसा भी होता है
अपना चेहरा ही
अनजाना सा लगता है,
अथक कोशिश के बावजूद
वह बेगाना सा लगता है,
जब स्वयं को भी हम
न पहचान पायें
ऐसे में हमें कोई बताये
भला हम कहाँ जाएँ?

दूसरों के जीवन में
तांक-झाँक करने वाले,
हर किसी को जानने का
दावा करने वाले,
अपने अंतर में ही वे
न झाँक कभी पायें,
औरों को क्या? स्वयं को भी
वे न जान पायें,
ऐसे में हमें कोई बताये
उनकी घूरती आँखों से
बच कर हम कहाँ जाएँ? <><><><>डॉ भारद्वाज

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#जाएँ_कहाँ?

महाभारत

भाई भाई के खून का प्यासा रहा है? क्या मानव ही मानव का सबसे बड़ा दुश्मन है?

सत्य पथ

 Mahabharat
#महाभारत
<><><><>
क्यों डींग मारते हो
महाभारत की?
भाई भाई के खून से
लिखी है ये कथा ! <><><><> डॉ भारद्वाज 

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महाभारत

हास्य-भावना

विशाल हृदय क्व नेता

सत्य पथ

Madhuकुछ प्रसंग जरूर पढ़ना चाहिये। (आलेख : खंडवा तरुण मंडलोई) 
1973 मे समाजवादी नेता मधु लिमये बांका संसदीय क्षेत्र से उप चुनाव मे चुनाव लड़ रहे थे । यह सीट काँग्रेस के सांसद शिव चंडिका जी के निधन से खाली हुई थी । मधु लिमये के खिलाफ काँग्रेस की शकुन्तला देवी और समाजवादी नेता राजनारायण चुनाव लड़ रहे थे ।

हमारे शहर के नागरमल बाजोरिया (धरती पकड़) जिन्हें चुनाव लड़ने का एक नशा था, मैदान मे थे और उनकी जमानत ज़ब्त भी हो गई थी।

त्रिकोणात्मक संघर्ष मे मधु लिमये विजय हुये और उनकी विजय पर स्थानीय एक स्कूल मे सभा हुई जिसमें  मधु लिमये ने मतदाताओ को समर्थन के लिए धन्यवाद दिया । मंच पर हमारे मित्र नागर मल भी उन्हे बधाई देने के लिए उपस्थित थे,

जब मधु लिमये भाषण कर रहे थे तब उन्होने पीने के लिए एक ग्लास पानी मांगा । नागरमल ने कार्यकर्ता के हाथ…

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हास्य-भावना

हास्य-भावना

Madhu

कुछ प्रसंग जरूर पढ़ना चाहिये। (आलेख : खंडवा तरुण मंडलोई) 
1973 मे समाजवादी नेता मधु लिमये बांका संसदीय क्षेत्र से उप चुनाव मे चुनाव लड़ रहे थे । यह सीट काँग्रेस के सांसद शिव चंडिका जी के निधन से खाली हुई थी । मधु लिमये के खिलाफ काँग्रेस की शकुन्तला देवी और समाजवादी नेता राजनारायण चुनाव लड़ रहे थे ।

हमारे शहर के नागरमल बाजोरिया (धरती पकड़) जिन्हें चुनाव लड़ने का एक नशा था, मैदान मे थे और उनकी जमानत ज़ब्त भी हो गई थी।

त्रिकोणात्मक संघर्ष मे मधु लिमये विजय हुये और उनकी विजय पर स्थानीय एक स्कूल मे सभा हुई जिसमें  मधु लिमये ने मतदाताओ को समर्थन के लिए धन्यवाद दिया । मंच पर हमारे मित्र नागर मल भी उन्हे बधाई देने के लिए उपस्थित थे,

जब मधु लिमये भाषण कर रहे थे तब उन्होने पीने के लिए एक ग्लास पानी मांगा । नागरमल ने कार्यकर्ता के हाथ से पानी का ग्लास ले लिया और खुद आगे बढ़ कर मधु लिमये को वह पानी ग्लास दे दिया ।

जब मधु लिमये पानी पी रहे थे तब बाजोरिया जी ने माइक संभाली और बोले, ” उपस्थित भाइयो! आप सब गवाह हैं कि भले मैं चुनाव नहीं जीता लेकिन आप देख रहे हैं मैंने मधु लिमये को चुनाव मे पानी पिला दिया। उनका इतना कहना था कि उपस्थित सारी जनता ताली पीट कर जोरों से हंस पड़ी और लिमये जी को भी कहना पड़ा, “मुझे नागर बाबू ने सही मे पानी पिला दिया है ।”

उस समय चुनाव मे कटुता नहीं होती थी और हास्य बोध भी था ।

हास्य-भावना