नमक सत्याग्रह

Source: नमक सत्याग्रह

ये थे गांधीजी जिनको आज की एक विशेष-पीढ़ी निरंतर कोसती रहती है.

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नमक सत्याग्रह

नमक सत्याग्रह

Gandhi 1

नमक सत्याग्रह तो एक बहाना था. उद्देश्य तो और भी श्रेष्ठ था जिसका ज़िक्र गाँधीजी ने अपने प्रत्येक पड़ाव के बाद दिए भाषण में किया था मगर अँगरेज़ अंत तक गांधीजी की मंशा को समझ ही नहीं पाए.

ये श्रेष्ठ उद्देश्य था साम्प्रदायिक सद्भाव जिसमें गाँधीजी पूर्णतया सफल हुए. कूच के दौरान बापू ने कहा कि साम्प्रदायिक एकता न हो तो उनके लिए स्वराज का कोई अर्थ ही नहीं है. इससे प्रेरित होकर मुस्लिम “अली-बंधुओं” की अपील को ठुकराते और “शारदा एक्ट” पर अपनी नाराजगी भुलाते हुए इस यात्रा में शरीक हुए थे.

ये प्रथम अवसर था जब अँगरेज़ भारतीय मानस को समझने में विफल रहे थे. आज के कट्टर मुस्लिमों और हिन्दुओं दोनों को ये जान कर आश्चर्य होगा कि गांधीजी ने कूच से पहले ही अपनी गिरफ़्तारी की स्थिति में सत्याग्रह की बागडोर श्री अब्बास तैयबजी को सौपने का निश्चय कर लिया था. ये भी तय कर दिया था अगर तैयबजी भी गिरफ्तार कर लिए जाते हैं तो बागडोर किसे संभालनी है और वे थीं सरोजिनी नायडू.

इन दोनों निर्णयों में कितने गूढ़ सन्देश छिपे थे, पाठक जान ही गए होंगे.

दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू होकर करीब 400 किलोमीटर की यात्रा के बाद सत्याग्रही 5 अप्रेल को दांडी पहुंचे और गांधीजी ने समुद्र-स्नान के बाद एक मुट्ठी नमक उठाया और नमक कानून को तोड़ दिया. अँगरेज़ हतप्रभ थे अपनी विफलता पर ! ये थे गांधीजी जिनको आज की एक विशेष-पीढ़ी निरंतर कोसती रहती है.

 

 

 

नमक सत्याग्रह

#क्या_लोग_थे?

Prashad

महाकवि जयशंकर प्रशाद न केवल कवि थे बल्कि अखाड़े के भी धनी थे. नियम से रोज कसरत और कुश्ती करना उनका शौक. मानवता कूट कूट कर भरी हुई थी. #कामायनी उन्हीं की कालजई रचना है.

एक बार कुछ मनचले भरे बाज़ार में आती जाती महिलाओं पर छीटाकशी कर रहे थे. जयशंकर प्रशाद जी ने उन्हें टोका. मनचले तो मनचले ठहरे. कहाँ मानने वाले थे?

जयशकर #पहलवान को भी ताव आ गया. एक जो सबसे बड़ा मुस्टंडा था उसको दाव लगा कर पटखनी दी ऊपर से दो तीन धौल और जमा दिए.

फिर क्या था? मनचले तो ऐसे गायब हुए जैसे गधों के सिर से सींग.

#क्या_लोग_थे?

#हे_देवी_हनीप्रीत

हे देवी ! कृपा करो. कृपा करो.

सत्य पथ

honeyआप कहाँ हो?  तुम्हारी याद में #भारतीय_प्रजातंत्र  का चौथा स्तमभ तथाकथित मिडिया मरा जा रहा हैं. तुम्हें 134 करोड भारतीयों की कसम ! बस एक बार इन सबसे तेज,आप को रखे आगे, देश का सबसे भरोसेमन्द, देश की धडकन वाले चैनलो को दर्शन दे दो.

पिछले 25 अगस्त  से ये आपके नाम की माला जप रहे हैं.  #हे_देवी  ! अब तो प्रकट हो जाओ.  इनका तडपना  हमसे देखा नहीं जाता. आप दर्शन दोगी तो तभी ये लोग आम जन के मुद्दों को उठा पायेंगे. बस अब आप पर ही कृपा अटकी हैं!

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#हे_देवी_हनीप्रीत