“आईआईटी नागपुर” में संस्कृत की कक्षा

मोदी : भगवान बोले अर्जुन तू भी चाय पी ले, मैं भी चाय पी लेता हूँ। फिर युद्ध करेंगे।

सत्य पथ

Politiciaan

मोहन भागवत : स्मृति इस श्लोक का अर्थ बताओ – “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन:”।

स्मृति ईरानी :  राधिका शायद रास्ते मे फल बेचने का काम कर रही है।

भागवत :   मूर्ख, ये अर्थ नही होता। अच्छा चल राजनाथ तू इसका अर्थ बता: “बहुनि मे व्यतीतानि,जन्मानि तव चार्जुन”।

राजनाथ : मेरी बहू के कई बच्चे पैदा हो चुके हैं, सभी का जन्म चार जून को हुआ है।

भागवत : अरे गधे, संस्कृत पढता है कि घास चरता है? तू किसी काम का नहीं। अच्छा बेटा अरुण जेटली तू इसका अर्थ बता : “दक्षिणे लक्ष्मणोयस्य वामे तू जनकात्मजा”।

जेटली : दक्षिण में खडे होकर लक्ष्मण बोला जनक आजकल तो तू बहुत मजे में है।

भागवत : (माथा पीटते हुए) सारे के सारे पागल भरे हैं। अच्छा बेटा नरेंद्र, तू सबसे ज्यादा होशियार शिष्य है मेरा। तुझे तो मालूम ही होगा। है न?

नरेंद्र मोदी : हाँ गुरूजी। मालूम है ना।

भागवत :…

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“आईआईटी नागपुर” में संस्कृत की कक्षा

मोदी : भगवान बोले अर्जुन तू भी चाय पी ले, मैं भी चाय पी लेता हूँ। फिर युद्ध करेंगे।

via “आईआईटी नागपुर” में संस्कृत की कक्षा

मोदी : भगवान बोले अर्जुन तू भी चाय पी ले, मैं भी चाय पी लेता हूँ। फिर युद्ध करेंगे।

“आईआईटी नागपुर” में संस्कृत की कक्षा

Politiciaan

मोहन भागवत : स्मृति इस श्लोक का अर्थ बताओ – “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन:”।

स्मृति ईरानी :  राधिका शायद रास्ते मे फल बेचने का काम कर रही है।

भागवत :   मूर्ख, ये अर्थ नही होता। अच्छा चल राजनाथ तू इसका अर्थ बता: “बहुनि मे व्यतीतानि,जन्मानि तव चार्जुन”।

राजनाथ : मेरी बहू के कई बच्चे पैदा हो चुके हैं, सभी का जन्म चार जून को हुआ है।

भागवत : अरे गधे, संस्कृत पढता है कि घास चरता है? तू किसी काम का नहीं। अच्छा बेटा अरुण जेटली तू इसका अर्थ बता : “दक्षिणे लक्ष्मणोयस्य वामे तू जनकात्मजा”।

जेटली : दक्षिण में खडे होकर लक्ष्मण बोला जनक आजकल तो तू बहुत मजे में है।

भागवत : (माथा पीटते हुए) सारे के सारे पागल भरे हैं। अच्छा बेटा नरेंद्र, तू सबसे ज्यादा होशियार शिष्य है मेरा। तुझे तो मालूम ही होगा। है न?

नरेंद्र मोदी : हाँ गुरूजी। मालूम है ना।

भागवत : तो आखरी बार पूछता हूँ इस श्लोक का सही सही अर्थ बताना। तू ही इज्जत रख सकता है अब तो। “हे पार्थ त्वया चापि मम चापि…….!” क्या अर्थ है जल्दी से बता।

मोदी : महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण भगवान अर्जुन से कह रहे हैं कि…….. मोहन भागवत उत्साहित होकर बीच में ही कहते हैं हाँ, शाबास ! बता क्या कहा श्रीकृष्ण ने अर्जुन से……..?

मोदी : भगवान बोले अर्जुन तू भी चाय पी ले, मैं भी चाय पी लेता हूँ। फिर युद्ध करेंगे।

(श्री रवि चन्द्र जोशीजी की कलम से)

“आईआईटी नागपुर” में संस्कृत की कक्षा

नवनिर्माण

आज व्यवस्था इतनी सड़ चुकी है कि विदेशों तक सडांध पहुँच गई. इसे ठीक करना तो नवनिर्माण के लिए सब कुछ ध्वंस करना होगा. 

सत्य पथ

Justice 2

कतई नहीं है गुमान

अपनी सामर्थ्य का, 

हमें ये ज्ञात है 

पत्थर से सिर टकराने से 

पत्थर का कुछ नहीं बिगड़ता. 

मगर 

हमें इतना विश्वास है इस जर्जर व्यवस्था को 

इतनी खोखली और क्षीण तो 

कर ही देंगे 

जिससे हमारी नई पीढ़ी 

इसे एक हल्का सा धक्का भी दे दे 

तो यह चरमरा जाएगी 

और हो जाएगी धराशायी 

और फिर होगा नवनिर्माण.  

डॉ भारद्वाज

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नवनिर्माण

नवनिर्माण

 

Justice 2

कतई नहीं है गुमान

अपनी सामर्थ्य का, 

हमें ये ज्ञात है 

पत्थर से सिर टकराने से 

पत्थर का कुछ नहीं बिगड़ता. 

मगर 

हमें इतना विश्वास है इस जर्जर व्यवस्था को 

इतनी खोखली और क्षीण तो 

कर ही देंगे 

जिससे हमारी नई पीढ़ी 

इसे एक हल्का सा धक्का भी दे दे 

तो यह चरमरा जाएगी 

और हो जाएगी धराशायी 

और फिर होगा नवनिर्माण.  

डॉ भारद्वाज

नवनिर्माण

#जाएँ_कहाँ?

आज मानव असमंजस का जीवन जीने को बाध्य है. भीड़-भाड़ भरी दूनियाँ में अपना वजूद खोता जा रहा है.क्या कहना है आपका?

सत्य पथ

KahaNपराये पराये होते हैं
सार्वभौमिक बात है,
अपने पराये हो जाते हैं
यह भी सभी को ज्ञात है.
मगर जब अपने आप में ही
हम हो जाएँ पराये
ऐसे में कोई तो हमें बताये
भला हम कहाँ जाएँ?

कभी कभी ऐसा भी होता है
अपना चेहरा ही
अनजाना सा लगता है,
अथक कोशिश के बावजूद
वह बेगाना सा लगता है,
जब स्वयं को भी हम
न पहचान पायें
ऐसे में हमें कोई बताये
भला हम कहाँ जाएँ?

दूसरों के जीवन में
तांक-झाँक करने वाले,
हर किसी को जानने का
दावा करने वाले,
अपने अंतर में ही वे
न झाँक कभी पायें,
औरों को क्या? स्वयं को भी
वे न जान पायें,
ऐसे में हमें कोई बताये
उनकी घूरती आँखों से
बच कर हम कहाँ जाएँ? <><><><>डॉ भारद्वाज

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#जाएँ_कहाँ?