भारतमाता का लाल “लालबहादुर शास्त्री”

हम उस समय सिर्फ 10 वर्ष के थे, मगर हमने भी हर मंगलवार को व्रत रख कर अपने माताजी-पिताजी का साथ दिया था.

सत्य पथ

Shastrijiसन 1965.

पाकिस्तान ने बिना किसी कारण के भारत पर आक्रमण कर दिया था. भारत के प्रधानमंत्री थे श्री लाल बहादुर शास्त्री. खादी में लिपटी ठिगनी क्षीण देह मगर हौंसला लौहपुरुष सा.

शास्त्रीजी ने एक क्षण गंवाए बिना ही अपनी सेनाओं को आक्रमणकारियों को मुँह-तोड़ ज़वाब देने का संकेत दे दिया. फिर क्या था? भारतीय सेनाएं चीतों की मानिंद दुश्मन पर टूट पड़ीं. दुश्मन के पाँव उखड़ने लगे.

भारतीय सेनाओं ने हाजी पीर दर्रे पर ही नहीं लाहोर पर भी कब्ज़ा कर वहां राष्ट्रीय तिरंगा फहरा दिया था. अन्न-संकट के कारण भारत अमरीका पर आश्रित था. मगर शास्त्रीजी ने अमरीका की भी नहीं सुनी और इस पर स्वयं एक दिन का व्रत रखते हुए अपने देशवासियों को साथ देने का आह्वाहन किया और पूरे देश ने मंगलवार का व्रत रखना शुरू कर दिया था.

हम उस समय सिर्फ 10 वर्ष के थे, मगर हमने भी हर मंगलवार को व्रत रख…

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