भगवानजी की व्यथा 

और इसी कारण आज तक मानव ईश्वर के दर्शन न कर सका. उसकी खोज में कहाँ कहाँ नहीं भटकता है इंसान मगर सिर्फ अपने दिल में ही नहीं पहुँच पाता. और जिसने अन्दर की यात्रा की उसने उसको पा लिया.

सत्य पथ

death-1भगवान
इंसान का निर्माण कर 
बहुत ही सकपकाया, 
सुबह शाम
रात दिन
अपने दर पर
उसे खड़े देख कर
सिर उसका चकराया
और
वो तो बहुत ही घबराया.
कोई रास्ता न पा
उसने अपने पार्षदों की
सभा बुलाई
और
उन्हें अपनी
व्यथा-कथा सुनाई. 

और पूछा,
“आखिर मनुष्य से पीछा
कैसे छुड़ाया जाये?
छोटे बड़े बूढ़े जवान
सभी तो पीछे पड़ गए.
जबसे उसे बनाने की की है भूल
चैन की सांस न हम ले पाए.” 

सभासद सिर धुनते रहे
लेकिन कोई हल
न सुझा पाए.

आखिर
एक सभासद ने सुझाव दिया,
“आप माउंट एवरेस्ट पर
जाकर रहें, और चैन की बंसी बजाएं.
वहां मनुष्य तो क्या
परिंदा भी न पहुँच सकेगा,
कोई भी आपके सुख में
न खलल डाल सकेगा.”


भगवान
सभासद के भोलेपन पर हँसे,
“बोले
पता नहीं है तुम्हें भाई
तेनजिंग बहुत ज़ल्द ही
करेगा एवेरेस्ट पर चढ़ाई
और हमें वहां से भी
भागना पड़ेगा
और होगी जगहंसाई.” 

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