भगवानजी की व्यथा 

death-1
भगवान
इंसान का निर्माण कर 
बहुत ही सकपकाया, 
सुबह शाम
रात दिन
अपने दर पर
उसे खड़े देख कर
सिर उसका चकराया
और
वो तो बहुत ही घबराया.
कोई रास्ता न पा
उसने अपने पार्षदों की
सभा बुलाई
और
उन्हें अपनी
व्यथा-कथा सुनाई. 

और पूछा,
“आखिर मनुष्य से पीछा
कैसे छुड़ाया जाये?
छोटे बड़े बूढ़े जवान
सभी तो पीछे पड़ गए.
जबसे उसे बनाने की की है भूल
चैन की सांस न हम ले पाए.” 

सभासद सिर धुनते रहे
लेकिन कोई हल
न सुझा पाए.

आखिर
एक सभासद ने सुझाव दिया,
“आप माउंट एवरेस्ट पर
जाकर रहें, और चैन की बंसी बजाएं.
वहां मनुष्य तो क्या
परिंदा भी न पहुँच सकेगा,
कोई भी आपके सुख में
न खलल डाल सकेगा.”


भगवान
सभासद के भोलेपन पर हँसे,
“बोले
पता नहीं है तुम्हें भाई
तेनजिंग बहुत ज़ल्द ही
करेगा एवेरेस्ट पर चढ़ाई
और हमें वहां से भी
भागना पड़ेगा
और होगी जगहंसाई.” 


चन्द्रदेव
सभासद के सुझाव पर
मन ही मन मुस्काये
वे आगे आये और सुझाव दिया,
“आप मुझ पर आकर रहें
और निश्चिन्त हो जाएँ.”


चंद्रदेव की अज्ञानता पर
भगवानजी खूब हँसे
बोले,
“तुम भी खूब फंसे
तुम्हें पता नहीं
यूरि गागारिन ज़ल्द ही
तुम पर भी चढ़ाई करेगा
और
हमें वहां से भी
भागना पड़ेगा.” 


वरुणदेव ने
जल में रहने की युक्ति सुझाई
मगर
भगवानजी को
वह भी समझ में न आई.

अंत में
एक बूढ़े पार्षद ने
बहुमूल्य सुझाव दिया
“प्रभु !
आप जहाँ भी जायेंगे
इंसान से न बच पायेंगे
सिर्फ एक जगह है
जहाँ न वह पहुँच सकेगा
और आपको न कभी भी
ढूंढ सकेगा.
आप उसी के ह्रदय को
अपना निवास बना लें
और फिर
चैन की सांस लें
क्योंकि
वह आपको ढूँढने को
दर-दर की ख़ाक छानेगा
मंदिर-मस्जिद गिरजे गुरूद्वारे
में भटकेगा
मगर
अपने अन्दर ही न कभी
झाँक सकेगा,
और आपको न कभी भी
ढूंढ सकेगा.”
*********************************************************डॉ भरद्वाज क्षजान

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भगवानजी की व्यथा 

3 thoughts on “भगवानजी की व्यथा 

  1. और इसी कारण आज तक मानव ईश्वर के दर्शन न कर सका. उसकी खोज में कहाँ कहाँ नहीं भटकता है इंसान मगर सिर्फ अपने दिल में ही नहीं पहुँच पाता. और जिसने अन्दर की यात्रा की उसने उसको पा लिया.

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  2. Reblogged this on सत्य पथ and commented:

    और इसी कारण आज तक मानव ईश्वर के दर्शन न कर सका. उसकी खोज में कहाँ कहाँ नहीं भटकता है इंसान मगर सिर्फ अपने दिल में ही नहीं पहुँच पाता. और जिसने अन्दर की यात्रा की उसने उसको पा लिया.

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