पीढ़ी-अंतर

Gen Gap 2

पीढ़ी-अंतर सदैव रहता है. विकास के सिद्धांत के अनुसार ये स्वाभाविक भी है. पीढ़ी-अन्तर सदैव रहेगा. हाँ अगर संतान थोड़ी सी समझ से काम ले तो पीढ़ी-अंतर के कारण जो टकराव कभी कभी परिवार में पैदा हो जाता है, उससे बचा जा सकता है.

इसके लिए मूल-मन्त्र है : माता-पिता सदैव अपनी संतान की हित की ही बात करते हैं. संतान अगर सिर्फ इस बात को समझ ले तो घर का वातावरण तनाव-मुक्त रहता हैं.

ये भी नहीं है कि संतान सदा ही गलत हो. अगर संतान अपनी बात शांति के साथ माता-पिता के सम्मुख रखती है तो वे अपनी संतान की बात को समझने की कोशिश ज़रूर करते हैं.

मगर माता-पिता फिर भी अगर संतान की सलाह के विरुद्ध फैसला करते हैं तो संतान को उनके अनुभव का लाभ उठाने से पीछे नहीं रहना चाहिए.

माता-पिता का चूँकि अपनी औलाद के साथ खून का रिश्ता होता है वो उसका पालन पोषण अपनी सामर्थ्य से बाहर जाकर भी करते हैं, सदैव उनके हित की ही सोचते हैं. और ये होता है निस्वार्थ,

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पीढ़ी-अंतर

3 thoughts on “पीढ़ी-अंतर

  1. माता-पिता और संतान की थोड़ी थोड़ी समझ परिवार की शान्ति को संभाल सकती है. और देखें कि इसी में सबकी भलाई है. नौज़वान साथी बुरा न माँने तो हम कहेंगे कि आज संतान न तो परिवार की परवाह करती है और न ही अपना क्योंकि ऐसी उदंडता का अंत अधिकतर ख़राब ही पाया जाता है. बहन-बेटियों के मामले में तो ये और भी भयानक साबित होता है. अत: नई पीढ़ियों को क्षणिक सुख या कहें जिद के चलते अपने माता-पिता के अनुभवों से वंचित नहीं होना चाहिए.
    आप सब का दिन शुभ हो.

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