अंतरात्मा से साक्षात्कार

Cosmic Consciousness 1

आप हमारे हैं कौन

नहीं पता?

ऐसा भी नहीं

हम मिले हों कहीं.

मगर इतना निश्चित है

आप अजीब हैं

फिर भी

दिल के इतने करीब हैं.

 

असमंजसताओं से घिर

चेतनाशुन्य हो

जब निढाल हो जाता हूँ

आपको सदैव अपने करीब पाता हूँ

मेरे स्वाभिमान की रक्षा-खातिर

आपको तत्पर पाता हूँ.

 

आप हमारे हैं कौन

नहीं पता,

आत्म-साक्षात्कार हुआ

पता लगा

आप तो और कोई नहीं

हमारी ही अंतरात्मा हैं

इसीलिए आप इतने “अजीब” हैं

फिर भी दिल के इतने करीब हैं.

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अंतरात्मा से साक्षात्कार

One thought on “अंतरात्मा से साक्षात्कार

  1. हम अपने आपको कितना जानते हैं. निश्चित ही अनिश्चित है. अगर जानते तो कभी भी हम कोई त्रुटि न करते. और जब जानते हैं तो पहली बार अपनी आत्मा के रूबरू होते हैं.लेकिन उस समय अपनी ही अंतरात्मा से भयभीत हो जाते हैं क्योंकि वह हमें हमारे वास्तविक स्वरुप के सम्मुख वैसे ही रख देती है जैसे हज्जाम. और अपनी असलियत जान कर भयभीत होना स्वाभाविक है क्योंकि हमारे अन्दर तो न जाने क्या क्या उल-ज़लूल चलता रहता है और हमें उसका आभास् तक नहीं होता. ऐसे में हम सच्चे मानव बन जाते हैं. अंतरात्मा हमारी सर्वश्रेष्ठ गुरु बन जाती है…. …………….

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