कुछ शेर

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लोग दूसरों को समझने में अपनी जिंदगी गंवा देते है,
इसी उधेड़ बुन में स्वयं को समझना ही भूल जाते हैं।

झलक दिखा कर हमें कहाँ गायब हो जाते हो
रेगिस्तान में रहते हो मृगमरीचिका बन जाते हो।
क्या सुनाएँ हाल-ए-दिल अपना
दिन तो गुजर जाता है आनंद में,
मगर रात को आते हो बन कर सपना।

वो चहक कर कहते है, हम उनकी जान हैं
हम कैसे जान हैं, जब खुद ही बेजान हैं।

ज़्मुहूरियत देती है सबक मगर खुद पालन करती नहीं
इसी कारण इंसानियत का खून ये गाहेबगाहे बहाती रही।

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कुछ शेर

3 thoughts on “कुछ शेर

  1. nice written …………..arz kiya hai hum tho nikle thy ghumny rygistan ,pahunch gye pakistan,waha dekha ek insan jo tha pahlwan ,na hee wo kush tha na hee hairan, par mujhy dekh bola kaha se aye ho tum insan ,mera jabab tha Hindustan,Hindustan.

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